जर्मनी टी वी चैनल ज़ैड डी एफ़ को साक्षात्कार देते हुए ईरान के राष्ट्रपति मैहमूद अहमदी नेजाद ने कहा है कि ईरान परमाणु शस्त्रों का विरोधी है और उनके प्रयोग को मानवता एवं नैतिकता के विरुद्ध मानता है।
अहमदी नेजाद ने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों एवं समझौतों के अनुसार ईरान परमाणु उर्जा से लाभ उठाना चाहता है और इन नियमों के न्यायपूर्ण ढंग से लागू करने पर बल देता है, यही कारण है कि वह दबाव और धमकियों के मुक़ाबले में डटा हुआ है।
ईरान के राष्ट्रपति ने परमाणु विषय के संबंध में पुनः ईरान की मूल नीति का उल्लेख किया है।
ईरान परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में से एक है और उसकी समस्त परमाणु गिविधियां आईएईए की देख रेख में जारी हैं। परमाणु एजेंसी की अनेक रिपोर्टों में भी इस बात की पुष्टि की गयी है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां एन पी टी के अनुसार हैं। अतः स्पष्ट है कि एजेंसी के नियमानुसार ईरान को परमाणु अधिकारों से लाभ उठाने का अवसर मिलना चाहिए। किन्तु इसके बावजूद दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में सोमवार को अमरीका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने ईरान के विरुद्ध निराधार दावों को दोहराते हुए ईरान से मांग की है कि वह परमाणु कार्यक्रम बंद करदे और टकराव से बचे।
ध्यान योग्य बिंदु यह है कि अमरीका सहित पश्चिम का ईरान पर दबाव परमाणु कार्यक्रम को लेकर नहीं है इस लिए कि इस विषय में चिन्ता तर्कहीन है। इस व्यवहार का मूल कारण ईरान की प्रगति एवं विकास के मार्ग में विघ्न उत्पन्न करना है। इसी उद्देश्य से शत्रु देशों ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगाये थे परन्तु यह विषय स्वयं उन देशों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है।
यही कारण है कि अमरीका को इन प्रतिबंधों के लागू कराने में योरोप तथा एशिया के कुछ देशों की ओर से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा और उसे कुछ देशों को प्रतिबंधों से अलग करना पड़ा।
निःसंदेह परमाणु विज्ञान ईरान में स्थापित हो चुका है। और भविष्य में भी देश की प्रगति एवं विकास के लिए परमाणु उर्जा से लाभ उठाने के लिए ईरानी राष्ट्र दृढ़ संकल्पित है और समस्त दबावों के समक्ष डटा हुआ है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने भी बल देकर कहा है कि यदि ईरान पर आक्रमण हुआ तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जायेगा।