ईरान के विरुद्ध अमरीकी धमकियों का ठोस उत्तर
कोड: 294847 दिनांक: 2012/02/05स्रोत: print

ईरान के विरुद्ध अमरीकी धमकियों का ठोस उत्तर

तेहरान में नमाजे जुमा के ख़ुतबो में इस्लामी क्रांति के वरिष्ट नेता ने क्षेत्र तथा विश्व के महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनौतियों पर नियंत्रण प्राप्त करना इस्लामी क्रांति की अति महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है..... 

 ईरान के विरुद्ध अमरीकी धमकियों का ठोस उत्तर

तेहरान में नमाजे जुमा के ख़ुतबो में इस्लामी क्रांति के वरिष्ट नेता ने क्षेत्र तथा विश्व के महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनौतियों पर नियंत्रण प्राप्त करना इस्लामी क्रांति की अति महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। आयतुल्लाहिल उज़मा अली खामेनेई ने ऐतिहासिक अपमान से छुटकारा तथा राष्ट्रीय सम्मान की प्राप्ति को इस्लामी क्रांति की उपलब्धताओं में बताया तथा उल्लेख किया कि इस्लामी क्रांति की सफलता के पश्चात ईरानी राष्ट्र कि जिसे देश के राजनीतिक विषयों से अलग थलग कर दिया गया था एक प्रभावशाली राष्ट्र में परिवर्तित हो गया। इस्लामी क्रांति की मान्यताओं के जड़ पकड़ लेने की ओर वरिष्ठ नेता ने संकेत करते हुए कहा कि इसका प्रभाव आज पीड़ित राष्ट्रों का जिनमें से एक फ़िलिस्तीन है प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अमरीकी अधिकारियों द्वारा बारमबार यह वक्तव्य दोहराये जाने की ओर कि सारे विकल्प खुले हुए हैं, संकेत करते हुए कहा कि इस वक्तव्य का अर्थ युद्ध की धमकी है लेकिन सब जानते हैं कि यह धमकी स्वंय अमरीका के लिए हानिकारक है इसी प्रकार युद्ध छिड़ने पर भी अमरीका को 10 गुना अधिक हानि होगी।
आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली खामेनेई ने कहा कि अमरीकियों को जान लेना चाहिए यद्यपि वह अच्छी तरह जानते हैं कि युद्ध एवं तेल पर प्रतिबंधो की धमकियों के मुक़ाबले में इस्लामी गणतंत्र भी धमकी दे सकता है और समय आने पर ऐसा किया भी जायेगा। तीन दशको से भी अधिक समय से अमरीका और उसके सहायक देश ईरान के विरुद्ध षडयंत्र रचते रहे हैं। जैसे कि ईरान पर आठ वर्षों तक युद्ध थोपना, प्रतिबंधो का विस्तार, परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या तथा इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को आंतरिक रुप से क्षति पहुंचाने का प्रयास, वर्तमान में भी अमरीका और उसके साथी युद्ध की धमकियों के साथ साथ तेल पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास कर रहे हैं।
वास्तविकता यह कि ईरानी राष्ट्र ने प्रतिबंधो को आंतरिक क्षमताओ एवं योग्यताओ की उपयोगिता से विकास तथा प्रगति जैसे सुनहरे अवसर में परिवर्तित कर दिया है।
महत्वपूर्ण विषय यह है कि अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ तथा मध्य पूर्व में अमरीका को पराजय का सामना करना पड़ा है और इसी के साथ उसके पिछलग्गु देश जैसे फ़्रांस एवं ब्रिटेन आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं।
जैसा कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने उल्लेख किया है कि जिस शासन पर से उसके राष्ट्र का भरोसा उठ जाता है उसके बाक़ी रहने की कोई आशा नहीं बचती और उसके भाग्य में केवल पतन एवं विध्वंस ही रह जाता है। सोवियत यूनियन का विघटन इसका उदाहरण है।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ)



 




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