इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महानता (1)
कोड: 297014 दिनांक: 2012/02/16स्रोत: print

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महानता (1)

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म उस परिवार में हुवा, जहाँ सुबह व शाम अल्लाह के सम्मानित फरिश्ते (ईश पार्षद) अवतरित होते हैं 

सय्यद मुहम्मद सक़लैन जौरासी


 इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महानता (1)

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महानता
और सुन्नी विद्धानों के दृष्टिकोण
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का  जन्म उस परिवार में हुवा, जहाँ सुबह व शाम अल्लाह के सम्मानित फरिश्ते (ईश पार्षद) अवतरित होते हैं، जो घर ईश्वरीयप्रेरणा (वही-ए-इलाही) का केंद्र है, जहाँ एक क्षण के लिए भी अल्लाह से सम्पर्क विच्छिन्न (मुन्क़ता) होना असंभव है، जिस घर से सदैव आयाते क़ुरआनी की आवाज़ सुनाई देती है। आप का पालनपोषण उस पवित्र स्त्री की गोद (आग़ोश) में हुआ जो वास्तव में मानवी आकृत (पैकर) में स्वर्गीय अप्सरा (बहिशती हूर) और अल्लाह की महिमा व सुंदरता (जलाल व जमाल) की सूचक थी، आप ने अपना बचपना ईशदौत्य (नुबुव्वत) के संग व्यवतीत किया और आपने ईशदूत के मुख (दहने रिसालत) जैसे स्वच्छ व पवित्र (शफ़्फ़ाफ़ व पाकीज़ा) स्रोत से आहार प्राप्त करके जहाँ गुणों तथा प्रवीणता व पूर्णता (फ़ज़ाएल व कमालात) के असीम सागर से सम्पर्क स्थापित किया वहीं वचन व प्रसंविदा (अहदो पैमान) की एक नई शैली का आधार भी रख दिया। कवि के अनुसारः
बज़ाहिर तो ज़बाँ चूसी बबातिन इब्ने हैदर ने
ज़बाँ दे दी पयम्बर को ज़बाँ ले ली पयम्बर से
आप मुसलमानों के मध्य पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम की स्मारिका, यादगार, निशानी और वास्तविक उत्तराधिकारी (जानशीन) थे। आप का व्यवहार व वार्तालाप  (रफ़्तार व गुफ़्तार) क़ुरआन के साँचे में ढ़ला होता था। यही कारण है कि समस्त मुसलमानों ने आपके गुणों तथा प्रवीणता व पूर्णता और आप के अनुपम (बेमिसाल) ज्ञानात्मक व आध्यात्मिक (इल्मी व मअनवी) स्थान को बिना किसी असहमति (बिल-इत्तेफ़ाक़) के स्वीकार किया है।
असंख्य (बेशुमार) सुन्नी धर्मशास्त्रियों ने अपनी किताबों में आप के गुणों तथा प्रवीणता व पूर्णता को स्वीकार किया है। अहले सुन्नत के प्रसिद्ध विद्धान याफ़िई लिखते हैं: गुलदस्तए रेसालूत, ख़ुलासए नुबुव्वत, फ़ज़ाएल व कमालात के मरकज़ और पैग़मबरे इस्लाम के नवासे हुसैन इब्ने अली। (अर्थात ईशदौत्य के पुष्पगुच्छ, ईशदौत्य के सारांश, गुणों तथा प्रवीणता व पूर्णता के केंद्र और इस्लामी ईशदूत के नाती हुसैन इब्ने अली।)
इसी प्रकार एक और प्रसिद्ध सुन्नी विद्धान ज़रन्दी हब्शी ने लिखा है कि हुसैन इब्ने अली अत्याधिक नमाज़, रोज़ा और हज अन्जाम देते थे आप अत्यन्त दानशील व अनुकम्पा शील (सखी व करीम) थे और आपने पैदल यात्रा करके पच्चीस बार हज  अंजाम दिए।
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