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तफ़्सीरः बक़रा-3 आयत नं 7 से आयत नं 9 तक अल्लाह ने उनके हृदय तथा कानों पर मुहर लगा दी है, उनकी आंखों पर पर्दा डाल दिया है तथा उनके लिए एक बड़ा दण्ड निर्धारित किया है। .....
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बक़रा-२ आयत नं 3 से आयत नं 6 तक पवित्र क़ुरआन ने जीवन तथा संसार को दो भागों में विभाजित किया है। एक वह भाग है जो अदृश्य तथा अज्ञेय है जिसका हमारी इन्द्रियां आभास तक नहीं कर सकतीं हैं तथा दूसरा वह भाग है जो भौतिक संसार है जिसका इन्द्रियों द्वारा आभास किया जाता है।
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सूरए बक़रह-1 आयत नं 1 से आयत नं 2 तक ईश्वरीय ग्रंथ क़ुरआने मजीद क दूसरे सूरे का नाम है सूरए बक़रह। बक़रह शब्द का अर्थ होता है गाय। बनी इस्राईल की गाय की कथा के कारण इस सूरे का नाम बक़रह पड़ा। सूरए बक़रह का आरंभ ऐसे अक्षरों से होता है जिनका विशेष अनुक्रम है तथा वे मनुष्य का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करते हैं।
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पवित्र क़ुरआन और धर्मांधियों का क्रोध पवित्र क़ुरआन, पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अमर चमत्कार और कभी समाप्त न होने वाले उच्च ज्ञान तथा तत्वदर्शिता का भण्डार है। यह ईश्वरीय पुस्तक उचित तथा अनुचित विचारों और व्यवहारों का मानदंड है।
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क़ुरआने मजीद की वही (अल्लाह का संदेश) |